वीरभद्र अवतार

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शिव का ये अवतार तब हुआ था जब सती ने दक्ष के यग्य में आपने प्राण त्याग कर दिए थे | ये बात जब शिव को पता चली तो उन्हें बहुत क्रोध आया | ऐसे में उन्होनें अपनी एक जटा तोड़ धरती पर फैंक दिया | इसी जटा से एक बेहद भयंकर पुरुष वीरभद्र का जन्म हुआ |वीरभद्र ने जल्द ही दक्ष का पूरा यज्ञ विध्वंस कर दिया और उसे मौत के घाट उतार दिया |

पिप्लाद अवतार

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इन्सान के जीवन में पिप्लाद अवतार का बहुत महत्व है | वह दधिची के पुत्र थे | लेकिन दधिची की मौत पिप्लाद के जन्म लेने से पहले हो गयी थी | जब पिप्लाद ने देवताओं से पूछा की किस कारण उनके पिता को ऐसी मौत प्राप्त हुई तो सब ने बताया की शनि की कुदृष्टि के कारण ये तकलीफ सहनी पड़ी | इस बार पिप्लाद ने क्रोध में शनि को नक्षत्र मंडल से गिरने का श्राप दे दिया | सब देवताओं के समझाने पर उन्होनें अपना श्राप तो वापस ले लिए लेकिन इस शर्त पर की १६ साल की उम्र तक शनि किसी को परेशान नहीं करेगा | आज भी शनि से बचने के लिए पिप्लाद का पूजन किया जाता है |

नंदी

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शिलाद मुनि ब्रह्मचारी थे | लेकिन उनका वंश समाप्त हो रहा था | उनके पितरों ने उनसे वंश बढ़ाने की बात कही | शिलाद शिव की तपस्या में लग गए | शिव ने उनके घर जन्म लेने का वादा किया | कुछ दिनों बाद खेत जोतते हुए शिलाद को एक बालक प्राप्त हुआ | उस बालक का नाम नंदी रखा गया |आगे चल नंदी शिव के प्रमुख गणाध्यक्ष बने |उनका विवाह मरुतों की पुत्री सुयशा के साथ हुआ |

काल भैरव

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एक बार विष्णु और ब्रह्मा में श्रेष्ठता के पीछे युद्ध होने लगा |तभी अचानक वहां एक तेज पुंज समान पुरुष उत्पन्न हुआ | उसे देख ब्रह्मा घमंड में बोले की तुम मेरे पुत्र हो इसलिए मेरी शरण में आओ | ये सुन शिव को बहुत गुस्सा आया और उन्होनें इस पुरुष को काल के समान घोषित किया |क्यूंकि वह बहुत भीषण था इसलिए उसे भैरव की उपाधि प्राप्त हुई | इसके बाद काल भैरव ने ब्रह्मा का एक सर आपने नाखून से काट कर फैंक दिया | क्यूंकि ऐसा करने से उसको ब्रह्म हत्या लग गयी थी तो उसने काशी जा कर आपने पापों का प्रायश्चित किया |

अश्वत्थामा

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गुरु द्रोण ने आपने लिए एक पुत्र की कामना की थी | इसके लिए उन्होनें शिवजी के कठिन तपस्या की | शिव ने उनके पुत्र की तरह जन्म लेने का वादा किया | अश्वत्थामा एक बहुत बहादुर एवं बलशाली पुरुष थे | कहते हैं की वह आज भी जीवित हैं और गंगा के किनारे वास कर रहे हैं | ऐसा शिव पुराण में भी लिखा हुआ है |

शरभ अवतार

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हिरान्य्कश्यपू की मौत के बाद नरसिंह अवतार यानि विष्णु का क्रोध शांत नहीं हो रहा था | ऐसे में सभी देवताओं ने शिवजी से मदद की गुहार लगायी | तब शिव ने शरभ यानि आधा हिरन आधा शरभ पक्षी का अवतार लिया |इसके पश्चात वह विष्णु को शांत करने पहुंचे | लेकिन तब भी जब विष्णु नहीं माने तो शिव उन्हें अपनी पूँछ में उड़ा कर आकाश में ले गए | विष्णु का गुस्सा शांत हो गया और उन्होने शिव से क्षमा मांग ली |

गृहपति

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धर्मपुर में विश्वानर नाम के साधू अपनी पत्नी शुचिश्मती के साथ रहते थे | दोनों के संतान न थी  | एक दिन शुचिश्मती ने आपने पति से पुत्र प्राप्ति का वार माँगा | अपनी पत्नी की इच्छा पूर्ण करने के लिए विश्वानर ने काशी में शिव के वीरेश लिंग  की साधना शुरू की | कुछ दिनों बाद वहां उन्हें शिव के रूप में एक बालक वहां दिखाई दिया | उस बालक ने उनके घर जन्म लेने का वादा किया | इसके कुछ ही दिनों बाद शुच्श्मती के गर्भ से पुत्र पैदा हुआ जिसका नाम ब्रह्मा ने गृहपति रखा |

दुर्वासा

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सती अन्युसुया और उनके पति अत्री ने तीनों देवताओं से पुत्र प्राप्ति के लिए घोर तपस्या की | ऐसे में ब्रह्मा ,विष्णु और महेश ने उनको ये वादा किया की उन तीनो के रूप पुत्र बन उनके घर में पैदा होंगे | समय आने पर ब्रह्मा से चंद्रमा , विष्णु से दत्तात्रेय और शिव से दुर्वासा का जन्म हुआ |

हनुमान

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शिव के ये सबसे श्रेष्ठ अवतारों में से एक हैं | जब विष्णु ने मोहिनी रूप लिया था तो शिव उन पर कामासक्त हो गए थे | इससे उनका वीर्यपात हो गया था | बाकि देवताओं ने इस वीर्य को पत्तों पर संभाल के रख दिया | वानर राज केसरी की पत्नी अंजनी के कान के माध्यम से ये वीर्य उनके गर्भ में स्थापित किया गया | इस कारण उनके गर्भ से हनुमान जैसे बलशाली पुत्र ने जन्म लिया |

वृषभ

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इस अवतार में शिव ने विष्णु के पुत्रों की हत्या की थी | ऐसा कहते हैं की देवताओं को मारने के लिए विष्णु पाताल लोक पहुंचे लेकिन वहाँ की चंद्रमुखी औरतों के साथ रमण करने लगे | इस कारण उनके कई सारे पुत्र पैदा हो गए | ये सब पुत्र उपद्रव मचाने लगे जिस कारण सभी देवताओं ने शिव से सहायता मांगी | वृषभ का अवतार ले शिव ने इन सब पुत्रो को मार गिराया |

यतिनाथ

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अर्बुदाचल पर्वत के समीप शिवभक्त आहुक-आहुका एक भील दंपत्ति रहते थे | शिव ने उनकी परीक्षा लेने की सोची | वह यतिनाथ रूप लेकर उनके पास अथीथ्य ग्रहण करने पहुंचे | आहुका ने आपने पति को अतिथि की सेवा करने को कहा | जब रात को सोने की बात आई तो आहुक ने अपनी पत्नी और यतिनाथ को घर के भीतर सोने का आग्रह किया और खुद उनकी सुरक्षा के लिए बाहर चला गया | जब सुबह दोनों उठे तो उन्होनें देखा की आहुक को जंगली जानवरों ने खा लिया है |इस पर यतिनाथ दुखी होने लगे लेकिन आहुका ने कहा की आप दुखी नहीं हो ये हमारी नियति है और एस कह पति की चिताग्नि में जलने को तैयार होने लगी तब शिव आपने असली रूप में आ गए और आहुका को आपने पति से अगले जन्म में मिलने का वरदान दिया |

 

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