शिव या महादेव सभी देवताओं में इष्ट माने जाते हैं | ऐसा भी कहते हैं की शिव की भक्ति करने वाले को जीवन में कभी दुःख का सामना नहीं करना पड़ता |जहाँ विष्णु के अवतारों की गाथा तो सब लोगों को मालूम है शिव ने भी कई अवतार लिए थे |पुराणों के मुताबिक शिव के १९ अवतार हुए थे | आज उन्हीं की महिमा जानते हैं |

 

कृष्ण दर्शन अवतार

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इक्ष्वाकुवंशीय श्राद्धदेव की नवमी पीढ़ी में राजा नभग ने जन्म लिया | जब वह पढाई के लिए आश्रम गए तो उनके भाइयों ने संपत्ति का बंटवारा कर लिया और उनके हिस्से में कुछ भी नहीं आया | जब ये बात नभग ने आपने पिता से कही तो उन्होनें कहा की यज्ञ में एक ब्राह्मण मोह माय में जकड़े होने के कारण उसे पूर्ण नहीं कर पा रहे है | ऐसे में आप उनका यज्ञ पूर्ण करा वह धन आपने लिए ले लो | नभग ने वैसा ही किया लेकिन जब वह यज्ञ का धन लेने लगे तो शिव कृष्ण दर्शन रूप में प्रकट हुए | उन्होनें कहा की इस धन पर मेरा हक है, तुम इसे नहीं ले सकते | नभग ने फिर आपने पिता से मदद मांगी तो वह कहने लगे की ये शिव हैं | इसके बाद नभग ने शिव की स्तुति कर उन्हें प्रसन्न किया |

अवधूत अवतार

 

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इंद्र का घमंड चूर करने के लिएय शिव ने अवधूत अवतार लिया था | एक दिन बृहस्पति और इंद्र शिव के दर्शन के लिए जा रहे थे | राह में उन्हें एक अजीब पुरुष मिला | इंद्र ने उससे रास्ता छोड़ने की कहा | जब वह मार्ग से नहीं हटा तो इंद्र ने उस पर अपना वज्र उठा लिया | ऐसा करने पर इंद्र का हाथ स्थाम्बित रह गया | बृहस्पति समझ गए ये शिव महिमा है | उन्होनें शिव की आराधना की जिसे बाद शिव ने इंद्र को माफ़ कर दिया |

 

भिक्शुवार्य अवतार

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विदर्भ नरेश सत्यरथ को उसके क्षत्रुओं ने मार डाला | मुश्किल से उसकी गर्भवती रानी भागती हुई एक वन में पहुंची | वहां उसने एक पुत्र को जन्म दिया | प्यास लगने पर जब रानी नदी के पास गयी तो एक मगरमच्छ ने उसे खा लिया | भूख से बालक रोने लगा तो एक भिखारिन वहां से गुजरी | उसने सोचा ये किस का बच्चा है तो तभी शिव भिक्षुक अवतार में आ गए | उन्होनें भिखारिन को बालक की असलियत बताई और उससे इसका पालन पोषण करने को कहा | उसने ऐसा ही किया और बड़े हो उस बालक ने क्षत्रुओं को हरा फिर से अपने  राज्य पर कब्ज़ा किया |

 

सुरेश्वर

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व्याघ्रपाद का पुत्र उपमन्यु आपने मामा के घर पल रहा था | वह हमेशा दूध मांगता रहता पर उसकी माँ के पास उसे पिलाने के लिए दूध नहीं  होता | एक दिन ज्यादा जिद करने पर उसकी माँ ने उसे नकली दूध बना कर पीने के लिए दिया | इस पर वह बहुत नाराज़ हो गया और माँ के कहने पर शिव भक्ति करने निकाल पड़ा | शिव ने सुरेश्वर यानि इंद्र का रूप धारण किया और बालक से कहा की शिव भक्ति छोड़ मेरी भक्ति कर लो | इस पर उपमन्यु उन्हें मारने को दोडा तो शिव आपने असली रूप में प्रकट हो गए | उन्होनें उप्मनुय को अपने भक्तों में परम पद और साथ में दूध का क्षीरसागर भेंट किया |

कीरत अवतार

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जब पांडव वनवास में थे तो अर्जुन ने शिव भक्ति पाने के लिए तपस्या शुरू की | दुर्योधन को मालूम पड़ने पर उसने मूढ़ नाम के राक्षस को अर्जुन को मारने भेजा | वह शूकर रूप में वहां पहुंचा तो अर्जुन ने तीर से उसको मार गिराया | इतने में शिव किरात रूप में आये और उन्होनें भी अपना तीर उस शूकर को मार दिया | अब अर्जुन ये कहने लगे की उस दानव को उन्होनें मारा है और इसी बात पर उनकी और शिव की लड़ाई शुरू होगई | लेकिन जब अर्जुन तो सत्य पता चला तो वह शिव के चरणों में गिर गए और शिव ने उन्हें करवों पर विजयी होने का आशीर्वाद दे दिया |

सुनटनर्तक अवतार

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जब पार्वती ने शिव को प्रसन्न कर लिया तो वह उनका हाथ हिमाचल से मांगने के लिए पहुंचे | उनहोनें नर्तक बन सब का मन मोह लिया | जब हिमाचल ने पुरुस्कार मांगने को कहा तो उन्होनें कहा की उन्हें पार्वती का हाथ चाहिए | हिमाचल गुस्सा हुए और नर्तक को वहां से जाने को कहा | जाते जाते शिव अपना असली रूप पार्वती को दिखा गए | जब हिमाचल और मैना को सत्य पता चला तो उन्होनें शिव का विवाह पार्वती से कराने के लिए हाँ बोल दी |

ब्रह्मचारी

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जब पार्वती कठोर ताप कर शिव को प्रसन्न करने का प्रयत्न कर रही थी तब शिव ने उनकी परीक्षा लेने के लिए ब्रह्मचारी अवतार लिया | इस रूप में वह पार्वती के पास पहुंचे | पार्वती ने उनकी विधि पूर्वक पूजा की | इसके बाद वह पार्वती से तपस्या का कारण पूछने के बाद शिव की निंदा करने लगे | इस पर पार्वती गुस्सा हो गयी | शिव प्रसन्न हो कर अपने असली रूप में प्रकट हो गयी |

यक्ष अवतार

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समुद्र मंथन जब हुआ तो शिव ने सारा विष पी लिया | लेकिन जब अमृत बाहर आया तो उसका पान सभी देवताओं ने किया | इस पर देवताओं को लगने लगा की वह अमर हैं और उनके बराबर कोई नहीं | शिव ने तब यक्ष अवतार लिया और सभी देवताओं से आपने द्वारा प्रकट किया गया तिनका हिलाने को कहा | जब सभी देवता ऐसा करने में असमर्थ रहे तो आकाशवाणी हुई की ये यक्ष शिव ही हैं | तब सभी देवताओं का घमंड टूटा और वह शिव से माफ़ी मांगने लगे |

 

 

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